स्वयं स्वच्छ
स्वच्छ भारत! हमारा सपना जाने कब पूरा होगा? परंतु भारत कौन है? अरे! हम सबसे ही तो भारत है हम चाहें तो कल ही स्वच्छ सवेरा होगा। ईश्वर को ढूँढने वालो भटकने की ज़रूरत नहीं। क्योंकि स्वच्छता है जहाँ वहाँ ईश्वर होता है। स्वच्छता में ही ईश्वर का बसेरा होगा। स्वस्थ रहेंगे अगर हम सब खुशियों का संचार होगा स्वच्छता को जीवन में लाकर जीवन का उद्धार होगा। सबकुछ जान चुके हैं हम किंतु, जानना है एक सच स्वच्छता की अगर चाहत है तो बनना होगा स्वयं स्वच्छ। — रिज़वान रिज़