तुम

मैं जानता हूँ कई मायनों में
तुम अलग हो मुझसे..
तुम्हारी भाषा, तुम्हारे तौर-तरीके
काफ़ी जुदा हैं, मेरे ख़्यालों से..
मगर फिर भी दिल को लगता है
तुम सचमुच इतने अनजाने नहीं।
बेशक़ तुम्हारा रंग-रूप
मेल नहीं खाता है मेरे चेहरे से
और न ही मैं ख़ूबसूरत हूँ
तुम जितना
मगर फिर भी दिल को लगता है
तुम सचमुच इतने अनजाने नहीं।
मैं नहीं हूँ तुम जैसा उम्दा फ़ोटोग्राफर
मगर मैं तुम्हारे चेहरे को अक्सर
रखता हूँ अपनी आँखों में..
क्योंकि इन्होंने खींच ली है
संसार की सबसे ख़ूबसूरत तस्वीर।

— रिज़वान रिज़

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Thankyou...
-Rizwan Riz

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