रिज़ By Rizwan Riz

तुम्हें पता भी न चलेगा।
और टूट जाएगा वो।
एक तारा।
जिसे तुम रिज़ कहती थीं।

फिर कोई नया तारा होगा।
तुम्हारे साथ।
इस आकाश-रूपी 
जीवन में।

-रिज़वान रिज़

Comments

Popular posts from this blog

गुलिस्तान

कुछ भी लिख देते हो

तेरी सूरत