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बहुत दिन हुए

बहुत दिन हुए, कोई कविता लिखे। कोई गीत सुने, कोई ख़्वाब बुने। बहुत दिन हुए। हर कविता, गीत और ख़्वाब। एक नई ज़िंदगी है। बहुत दिन हुए, जिंदगी जिए। — रिज़वान रिज़