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Showing posts from January, 2022

चला जाने वाला शख़्स By Rizwan Riz

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चला जाने वाला शख़्स कितना अच्छा होता है। इस दुनिया से चले जाने के बाद। उसके बोलने-सुनने रहने-सहने, कुछ कहने चलने-फिरने, खाने-पीने ज़िंदगी जीने और कभी-कभी तो मरने का अंदाज़ हर एक जीवित शख़्स को इतना पसंद आता है इतना पसंद आता है कि मानों वो शख़्स नहीं कोई अवतार या कोई चमत्कार हो। हर घर-गली-मुहल्ले में होती हैं चर्चाएँ उसकी हर सामान्य-सी बात को उसका अनूठा गुण बताते हुए। लोग थकते भी नहीं हैं उसके क़िस्से सुनाते हुए। इसलिए अक्सर ऐसा लगता है। चला जाने वाला शख़्स कितना अच्छा होता है। - रिजवान रिज़

तुमको भी ऐसा लगता है क्या? By Rizwan Riz

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कभी-कभी तन्हाई में शोर-शराबा लगता है क्या? तुमको भी ऐसा लगता है क्या? रोज सड़क पर चलते-चलते रस्ता भी साथ चलता है क्या? तुमको भी ऐसा लगता है क्या? आँखें बंद कर लेने पर भी कोई चेहरा दिखता है क्या? तुमको भी ऐसा लगता है क्या? जिसको चाहो वो ही नींदों में सपना बनकर दिखता है क्या? तुमको भी ऐसा लगता है क्या? वो जिसकी तुमको परवाह है तुम पर जान छिड़कता है क्या? तुमको भी ऐसा लगता है क्या? महज़ तुम्हें हँसाने की ख़ातिर नकली हँसी कोई हँसता है क्या? तुमको भी ऐसा लगता है क्या? इंतेजार किसी का ज्यादा हो जब कोई देर हमेशा करता है क्या? तुमको भी ऐसा लगता है क्या? इक बात बताओ मुझको तुम मैं तो तुमको चाहता ही हूँ। तुमको भी ऐसा लगता है क्या? इक शख़्स जो चुप बैठा है पीछे। 'रिज़वाँ’ जैसा लगता है क्या? तुमको भी ऐसा लगता है क्या? -रिज़वान रिज़

काश! तुम हमारे होते By Rizwan Riz

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काश! तुम हमारे होते। हम पूरे हो जाते। मुक़म्मल हो जाते कई सफर। कई  ख़्वाब पूरे हो जाते। काश! तुम हमारे होते। हमें फिर कोई आस न होती किसी और की तलाश न होती। किसी से मिलन की चाह न रहती आँखों में कोई भी राह न रहती। ख़ुद हम भी बस तुम्हारे होते। काश! तुम हमारे होते। और हम इतने उदास न होते। तन्हाई के साथ न रहते। वक़्त भी कितना प्यारा होता हम भी तुम्हारी बाहों में सोते। काश! तुम हमारे होते। - रिज़वान रिज़