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Showing posts from May, 2020

लौट आना आसान होता है By Rizwan Riz

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लौट आना आसान होता है उस वक़्त जब कोई देखता हो राह तुम्हारी और जलाये रखता हो इक दिया वापसी की उम्मीद में तुम्हारे लौट आने की। और भी आसानी हो जाती है वापसी में जो वो अगर ढूँढता आ जाए तुमको तुम तक और कहे प्यार से. आओ फिर से देखते हैं सपने साथ-साथ। -रिज़वान रिज़

हर शख़्स में बस तू नज़र आता है By Rizwan Riz

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हर शख़्स में बस तू नज़र आता है वो अलग बात है तू नज़र नहीं आता। लगता है तू मेरा था, मेरा ही तो था वरना उम्र भर यूँ याद नहीं आता। वो कहता है कि अब मेरा नहीं है वो उसे अपना ही साया नज़र नहीं आता। तू लाख बार मुकर जा अपने वादे से मुझे अपने वादे से मुकरना नहीं आता। उसके आँगन में जश्न-ए-ईद का माहौल है हम अभागो को चंदा नज़र नहीं आता। हम ही इश्क़ से पर्दा कर गए 'रिज़वाँ' मेरे बुलाने पर, क्या वो नहीं आता ? -रिज़वान रिज़

दिल का हाल रो-रोकर बताना हम न छोड़ेंगे By Rizwan Riz

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दिल का हाल रो-रोकर बताना हम न छोड़ेंगे तुम्हारी याद में आँसू बहाना हम न छोड़ेंगे। तू किसी और की तकदीर है ये जानते हैं हम हम फ़क़त तेरे दीवाने हैं बताना हम न छोड़ेंगे। तुम्हारे इश्क़ में हमने बस इतना ही पाया है तुम्हीं से ये ज़माना है ज़माना हम न छोड़ेंगे। तुम जा रहे हो छोड़कर ये जान लो लेकिन तुम्हारे दूर जाने से मुहब्बत हम न छोड़ेंगे। तुम्हें हर वक़्त हर लम्हा, हमारी याद आएगी तुम्हारा नाम हर लम्हा दोहराना हम न छोड़ेंगे। उदासी ये छुपाने को हम दिन में सोयेंगे लेकिन तुम्हारी याद में रातों को जगाना हम न छोड़ेंगे। तुम आख़िर हो क्या मेरे क्यूँ इतना सताते हो गर हम भी तुम्हारे हैं सताना हम न छोड़ेंगे। जानते हैं न आओगे अब तुम लौटके 'रिज़वाँ' तुम्हारी यादों से पर दिल लगाना हम न छोडेंगे। - रिज़वान रिज़

चलो कुछ इस तरह से गुज़ारा करते हैं

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चलो कुछ इस तरह से  गुज़ारा करते हैं। तुम नफ़े में रहो हम ही ख़सारा करते हैं। मेरे कुछ और करीब आ जाओ ऐं सनम। आज करीब से चाँद का नज़ारा करते हैं। वो जब रुख़ अपना मेरे ज़ानु पे रखते हैं। हम उनकी बिखरी ज़ुल्फें सँवारा करते हैं। इक पल भी नहीं रह पाता मैं बग़ैर उसके लोग जाने कैसे पूरी उम्र गुज़ारा करते हैं। यकीनन वो सिम्त हमारी ही हो जाती है। जिस तरफ़ हम ज़रा-सा इशारा करते हैं। झुक जाए जो सिर किसी शैतान के आगे ऐसी ज़िंदगी से हम मरना गवारा करते हैं। सचमुच इतनी कड़वी है  ज़ुबाने 'रिज़वाँ' कई चमचे इसके आगे किनारा  करते हैं। — रिज़वान रिज़

सुबह फिर होगी By Rizwan Riz

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इस अंधियारी रात के बाद सुबह फिर होगी। सब्र करो, हिम्मत रखो सुबह फिर होगी। फिर लगेंगे खुशियों के मेले दौड़ेंगी फिर से ये ठहरी हुई सड़कें फिर से घूमेंगे हम-तुम लिए हाथों में हाथ अपनी पसंद के शहरों में। फिर से करेंगे इबादत हम मन्दिर, मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारों में। फिर से रौनकें आएंगी वापस सूनसान पड़े इन शहरों में। फिर से होगा वो ही मन्ज़र जिसका हम तुमको है इन्तेज़ार। बस कुछ और सब्र करो यक़ीन रखो, दोपहर के बाद शाम और शाम के बाद रात के होने पर। यक़ीन रखो अपने रब पर। सुबह फिर होगी.. - रिज़वान रिज़ #WeWillDefeatCorona