कुछ भी लिख देते हो

तुम तो कुछ भी लिख देते हो।
हर चीज़ को सुंदर लिख देते हो।
तुम उसके चेहरे को चाँद
ज़ुल्फ़ों को बादल लिख देते हो।
तुम उसके लबों को गुलाब
आँखों को समंदर लिख देते हो।
इश्क़ इतना भी ख़ूबसूरत नहीं
जितना तुम लिख देते हो।
कोई ताउम्र भी नहीं करता
इतना प्यार किसी से
‛रिज़वाँ’ तुम जितना अपनी
एक ग़ज़ल में लिख देते हो।

— रिज़वान रिज़

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