गुलिस्तान

 

न चाहकर भी एक उदासी में रहता हूं।

मैं इन दिनों बड़ी मुसीबत में रहता हूं।

पूरी दुनियां नफ़रतों में मुब्तला है।

हर तरफ़ बर्बादियों का सिलसिला है।

लोग बड़ी आसानी से लोगों को मार देते हैं।

घरों, दुकानों, इबादतगाहों और

गुलिस्तानों को उजाड़ देते हैं।

हर सिम्त बस नफ़रत नज़र आती है।

फिर तेरी सूरत भी याद आती है।

— रिज़वान रिज़

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