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सतरंगी होली

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आज आसमाँ सतरंगी है कहीं पीला कहीं लाल धरती भी कुछ कम नहीं है है चारों ओर गुलाल। जब प्रकृति इतनी रंगीन है तो हम कैसे सादा हो जाएँ प्रकृति के रंगों को लेकर सतरंगी होली मनाएँ। देखो फागुन आ चुका है अब पानी से क्यों घबराएँ डर सरदी का छोड़ के हम-तुम इक-दूजे को रंग लगाएँ। नई-नई पोशाकें पहनें खीर-पापड़-गुजियाँ खाएँ। जो कोई रूठा हो हमसे आओ उसको आज मनाएँ। खुशियों के रंगों को लेकर सतरंगी होली मनाएँ। सब मिलजुल के एक हो जाएँ वैर-भाव को दिल से मिटाएँ जात-धरम को भूल-भाल के प्रेम का पावन पर्व मनाएँ। कोई किसी से खफ़ा न हो कोई किसी से जुदा न हो कोई भी मज़बूर न हो खुशियों से कोई दूर न हो खुशियाँ झूमें चारों ओर बस सब ग़म अपने घर को जाएँ चेहरों पे मुस्कानें लेकर सतरंगी होली मनाएँ। होली के इस शुभ दिवस पर अपने मन का मैल मिटा लें। इक-दूजे को बाहों में भरकर हम आपस की दूरी मिटा लें। ख़ुशियाँ आन खड़ी हैं द्वार पे आओ इनको गले लगा लें। हिरण्यकश्यपों का बध करके प्रहल...

लेकर हम दीवाना दिल

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लेकर हम दीवाना दिल घूमते हैं गली-गली दिल कहता है बार-बार इस गली तू मिल जाए मर जाएँ चाहें हम एक ही मुलाक़ात में दिल की एक तमन्ना है मौत से पहले तू मिल जाए तेरी वफ़ा पे हमें ऐतबार है ख़ुदा की रहमत का इंतेज़ार है रब से यही माँगते हैं तुझको भी हमारी वफ़ा का एहसास हो जाए — रिज़वान रिज़

बीस दिन

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बीस दिन हो गए उनसे बात किये हुए बीस दिन बाक़ी हैं शायद इस ज़िंदगी के लिए। बीस दिन से लफ्ज़ भी मेरे कुछ ख़ामोश हैं बीस दिन से मानों जैसे हम भी कुछ मदहोश हैं। बीस दिन से दिल को कुछ न अच्छा लगता है बीस दिन से कोई भी शख़्स न सच्चा लगता है। बीस दिन से आँखों में कुछ नमी-नमी-सी रहती है सब है मेरे पास में फिर भी कमी-कमी-सी रहती है। बीस दिन से हाल है ऐसा न हँसते है न रोते हैं बीस दिन से पता नहीं कब जगते हैं कब सोते हैं। बीस दिन से चाँद भी ख़ुद से नाराज़-सा लगता है देर से निकलता है बड़ी जल्दी-जल्दी छिपता है। बीस दिन पहले छोड़ गया था वो मुझको तन्हाई में बीस दिन से ढूँढ रहा हूँ उसको ख़ुद की परछाई में। बीस दिन तो बहाना है हम अरसों से उनसे दूर हैं कैसे कहें, क्या बतलायें कितने हम मज़बूर हैं। बीस दिन की ये जुदाई बीस बरस-सी लगती है दिन बेचारा तड़पता है बेबस नज़रें तरसती हैं। बीस दिन से राहों में इक सूनापन-सा रहता है बस ठहरो अब ठहरो 'रिज़वाँ' रस्ता मुझसे कहता है। — रिज़वान रिज़

आसाँ नहीं होता

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आसाँ नहीं होता.. किसी ग़म को छुपाना दिल पे भारी बोझ उठाना। आसाँ नहीं होता.. बेवज़ह मुस्कुराना, और मुस्कुराने की वज़ह बताना। आसाँ नहीं होता.. सच बताना, झूठ छुपाना किसी राज़ को दबाना। आसाँ नहीं होता.. उम्मीद लगाना, भरोसा दिलाना उम्मीदों पे खरा उतरना। आसाँ नहीं होता.. दिल लगाना, दिल चुराना और आँखों से बातें करना। आसाँ नहीं होता.. इज़हार करना, प्यार करना धोखा खाना। आसाँ नहीं होता.. न हँसना, न खिलखिलाना। पलकों पे आँसू लाना। आसाँ नहीं होता.. किसी का होना, उसे अपना बनाना किसी एक से दिल लगाना। आसाँ नहीं होता.. राह तकना, जुदाई सहना इक-दूसरे से अलग रहना। आसाँ नहीं होता.. वादा करना, कसमें खाना कसमों-वादों को निभाना। आसाँ नहीं होता.. दोस्ती करना, दुश्मनी रखना फिर अपने को तनहा पाना। आसाँ नहीं होता.. याद रखना, भूल जाना बीते वक़्त का लौट आना। आसाँ नहीं होता.. टूट जाना, फिर बिखरना बार-बार यही दोहराना। आसाँ ...

स्वयं स्वच्छ

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स्वच्छ भारत! हमारा सपना जाने कब पूरा होगा? परंतु भारत कौन है? अरे! हम सबसे ही तो भारत है हम चाहें तो कल ही स्वच्छ सवेरा होगा। ईश्वर को ढूँढने वालो भटकने की ज़रूरत नहीं। क्योंकि स्वच्छता है जहाँ वहाँ ईश्वर होता है। स्वच्छता में ही ईश्वर का बसेरा होगा। स्वस्थ रहेंगे अगर हम सब खुशियों का संचार होगा स्वच्छता को जीवन में लाकर जीवन का उद्धार होगा। सबकुछ जान चुके हैं हम  किंतु, जानना है एक सच स्वच्छता की अगर चाहत है तो बनना होगा स्वयं स्वच्छ। — रिज़वान रिज़

वो प्यारी मुस्कान

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ठोकर लगी तो थी किंतु, लगने का एहसास न हुआ वो प्यारी-सी मुस्कान मानों मेरी रक्षक थी। मदद थी या जीत थी वो मेरी पहचान न पाया मैं ईश्वर की उपस्तिथि की पहचान थी शायद। सहारा मिल गया था आगे बढ़े जा रहा था मैं हृदय में मगर वही प्यारी मुस्कान थी विषय नहीं था अब चिंता का भय की कोई बात न थी दुःख तो सिर्फ़ इतना ही था मंज़िल तो थी पर.. वो प्यारी मुस्कान न थी। — रिज़वान रिज़

तुम

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मैं जानता हूँ कई मायनों में तुम अलग हो मुझसे.. तुम्हारी भाषा, तुम्हारे तौर-तरीके काफ़ी जुदा हैं, मेरे ख़्यालों से.. मगर फिर भी दिल को लगता है तुम सचमुच इतने अनजाने नहीं। बेशक़ तुम्हारा रंग-रूप मेल नहीं खाता है मेरे चेहरे से और न ही मैं ख़ूबसूरत हूँ तुम जितना मगर फिर भी दिल को लगता है तुम सचमुच इतने अनजाने नहीं। मैं नहीं हूँ तुम जैसा उम्दा फ़ोटोग्राफर मगर मैं तुम्हारे चेहरे को अक्सर रखता हूँ अपनी आँखों में.. क्योंकि इन्होंने खींच ली है संसार की सबसे ख़ूबसूरत तस्वीर। — रिज़वान रिज़